दिल करता है ...
दिल करता है ...
ना जीने को दिल करता है,
ना हीं मर जाने को;
दिल करता है मेरा,
सुन्दर - सा नगर बसाने को |
जहाँ ना हो चोरी ड़कैती,
ना हीं हो मर महँगाई की;
जहाँ पाप समझे सब खाना,
कमाई हराम की |
जो संभाल सके इस,
बिगडते हुए ज़माने को;
दिल करता है मेरा,
ऐसा नगर बसाने को |
जहाँ अलग - अलग ना हों,
बात गीता, बाईबिल, कुरान की |
ना जात-पात, ऊँच-नीच हो,
जहाँ सब हों एक समान |
जहाँ राम-कृष्ण, नानक , ईसा,
सब आयें जीना सीखाने को;
दिल करता है मेरा,
सुन्दर सा नगर बसाने को |
Comments
Post a Comment