"अनुभव-मेरे जीवन का "
आँखे झूठी , बातें झूठी ,
चेहरा सारा झूठा है ,
बाहर अंदर सारा झूठा ,
ईमां ही तेरा झूठा है |
इस चेहरे के उपर न जाने ,
और भी कितनी कालिमाई है ,
कपट की लहरें तेरे भीतर ,
ना जाने कितनी गहराई हैं l
हर वादा तोडा है तुमने ,
यकीं नहीं तेरा करना ,
झूठी कसमे खा - खा कर ,
आदत है तेरी मुकर जाना l
दर्द नहीं कुछ तेरे दिल में ,
अश्रु ना मेरे पास बहाना ,
सब दूर हो गये मेरे जीवन से ,
तुम भी दूर चली जाना l
माना कि हम दूर थे तुमसे , पर इतने भी नही ,
थकान से चकनाचुर थे , मगर इतने भी नहीं ,
हमें अपनी महफ़िल में शामिल नहीं किया ,
माना गमों से भरपूर मजबूर थे , मगर इतने भी नहीं l
ख्वाब कोई फिर आखो में सजाने नहीं दिया ,
कुछ कहा भी नहीं, कुछ सुनाने भी नहीं दिया ,
अरे भूल से एक बार मैने तुम्हे रुला क्या दिया ,
ज़िन्दगी भर तुमने तो मुझे मुस्कराने भी ना दिया l
सहने की भी हद होती है ,
दिल तो नाजुक होता है ,
दुख नहीं बर्दाश्त होता तो ,
नैन भी तो बरसते हैं l
क्या बोलूँ , क्या सोचूँ ,
क्या करूँ कुछ पता नही ,
हाल ए दिल बताऊँ क्या ,
दिल में क्या कुछ पता नही l
हर सपने में आग लगी है ,
आशा की हर दीप बुझी है ,
मरने को तो मर सकता हूँ ,
पर जीना मेरी मजबूरी है l
दुनिया हसती है मेरी हालत पर,
मैं रोता अपनी किस्मत पर ,
बनाने वाला पागल होगा जो ,
तरस ना खाया मेरी सूरत पर l
माँ मिली पर ममता ना मिली ,
पिता मिला प्यार ना मिला ,
जो भी मिला बेवफा मिला ,
हाय , कैसा ये ऊजड़ा संसार मिला l
खुद को आजमाना चाहता हूँ ,
ठिकाना कोई बनाना चाहता हूँ ,
रास ना आयी जालिम दुनिया तो ,
जहां कोई नया बनाना चाहता हूँ l
लेखक :- " मनोहर " M. K. Srivastava
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