चोट अपनों की

सोने ने पुछा एक दिन लोहे से ,
तू चोट लगने पर इतना चिल्लाता क्यूं है ?
जबकि सुनार मुझे भी तो ,
हतौडे से ही चोट मारता है l
इतना सुनना था कि
लोहे का मुख मलीन हो गया ,
मामला अत्यंत संगीन हो गया ,
दुनिया भर का दर्द सारा ,
उसकी आँखों में समा गया l
साथ ही साथ लोहे के आगे ,
एक अंधेरा ....... To read continue
चोट अपनों की

Comments

Popular posts from this blog

"शायद वही है प्यार"

क्यों ...मेरा मन

कुछ सपने थे जो टूट गए