क्यों ... मेरा मन, भटकता रहता है ? सूनसान गलियों में, तो कभी तंहाईयों में, जाने किसे ढूंढता है? मेरा मन | शहरों व कस्बों में, गांव नगर में, जन निर्जन में, पहाड़, जंगल और बीहड़ में, आखिर किसे खोजता है ? मेरा मन | कौन है जो, मेरे अंतर्मन को इतनी गहराइयों तक छू गया? मन को मेरे चितवन से चुरा ले गया | कौन है वो, जिसने मेरे हृदय के सुनेपन में संगीत बिखेर दिये? दिल के हर तार को, कैसे उसने, झंकृत कर दिये ? आखिर, कौन है वो? जिसके लिए, मेरा मन, व्याकुल सा है | इस संसार से, विरक्त रहकर भी, किसके लिए, मेरा मन, इतना आसक्त है | किसकी, मेरे जीवन में तलाश है? कौन है वो, आखिर, कौन है वो, जिसके लिए, मेरा मन व्याकुल सा है ? https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=155086366232392&id=105834191157610 लेखक - मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव पता- निकट शीतला माता मंदिर , शितला नगर , ग्राम तथा पोस्ट - बिजनौर , जिला - लखनऊ , उत्तर प्रदेश , भारत , पिन - 226002 सम्पर्क - 8787233718 E-mail - manoranjan1889@gmail.com
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