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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष

🙏🌷 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस" की हार्दिक शुभकामनाएं। जय नारी शक्ति, जय भवानी! "यत्र नार्यस्तु पूज्यंते, तत्र रमंती देवाः।" अर्थात् जहां स्त्रियों की पूजा होती है, उन्हे सम्मान दिया जाता है, वहां रहना ईश्वर को प्रिय लगता है। "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।" अर्थात् माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी महान होती है, तभी तो देवता भी मां की गोद और आंचल की छांव के लिए स्वर्ग का त्याग कर धरा पर जन्म पाने को लालायित रहते हैं। नारी तू नारायणी, और तू ही महिषासुर मर्दनी भी है अर्थात् स्त्री यदि जन्म देना जानती है, साथ जीवन के सुख दुःख बांटना जानती है, लालन पालन करना जानती है तो समय आने पर दुर्गा शक्ति और चंडी का रुप धर जग का संहार भी कर सकती है। इसका व्यापक उदाहरण रामायण और महाभारत हैं। बिना स्त्री के संसार और जीवन चक्र की कल्पना तो स्वयं ब्रह्मा के लिए भी संभव नहीं, तो मानव क्या है? हे मानव कर तू प्रतिज्ञा, करेगा स्त्री का सम्मान तू स्त्री है तो जीवन है, जीवन में राग संगीत है प्रेम है....(शेष आगे) स्त्रियों को समर्पित "स्त्री" साझा काव्य संग्रह Pub...

हिंदी बिन हिंदुस्तान

हिंदी है तो हिंदुस्तान वरना नहीं वतन ये महान निज गौरव और संस्कार बिना कहो कैसे बने मेरा भारत महान। मातृ भाषा का सम्मान नहीं, निज गौरव पर अभिमान नहीं, करते बड़बोले लंबी चौड़ी बात, समझा दो फिर कैसे मेरा भारत महान।....🙏

प्रकृति

धरा मां और प्रकृति उसकी गोद है। यही तो जीवन उसे जीने का सार है। प्रकृति बिना जीवन कैसे संभव है? जैसे ममता बिन बालक की पुकार है।

व्यथा - स्त्री मन की ( डायरी )

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व्यथा - स्त्री  मन की ( डायरी ) मैं स्त्री हूँ .... हाँ, मैं वही स्त्री हूँ, जिसे इस पुरूष प्रधान समाज ने, हमेशा हीं प्रताड़ित किया है | हाँ, वही समाज जिसने, मेरे प्रति अत्याचार किया, व्यभिचार किया और, मेरी इस दयनीय स्थिति का  पूर्णत: ज़िम्मेदार भी है | वह समाज मेरा अपराधी है, और मैं उससे पीड़िता, फिर भी हर बार, बारम्बार  लान्छन मुझ नि:स्पृह पर हीं लगाया गया  और अपराधी भी मुझे हीं ठहराया गया | जिसने मेरा शील भंग किया, मेरे मन का मर्दन, सम्मान का हनन किया, आज वही पुरूष प्रधान समाज मुझे चरित्रहीन बता रहा हा, और अपनी वासना का कलंक मुझ निर्दोषा पर लगा रहा है | क्या कभी सोचा है .... कोई स्त्री कभी स्वेच्छा से क्या चरित्रहीन बनी है ? नहीं ... कभी नहीं ... ऐसा कभी नहीं हुआ | फिर उसे ऐस अवस्था में कौन लाया ? चुप क्यों हो...? क्या जानते नहीं .. य़ा फिर बोलना नहीं चाहते | मैं बताती हूँ.... मुझे ऐसा बनाने वाला  ये पुरूष प्रधान समाज हीं है | यहाँ के कुछ दिखावटी  चरित्रवान पुरूष, हाँ वही चरित्रवान पुरूष जो  सबके सामने अपने चरित्र का ढ़िंढ़ोरा पिटत...

फिर तांडव करना होगा

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फिर तांडव करना होगा  हे नारी ! आखिर कब तक सहेगी तू , अबला बन, प्रताड़ित होती रहेगी तू ; बहुत हो चुका, दूसरों  के लिए जीना मरना , अब तो तुझे खुद के लिए लड़ना होगा, माँगना नहीं अधिकार, तुझे छिनना होगा, दिखला दे जग को, तू नहीं है अबला, तूझे कुछ ऐसा करना होगा,लड़ना होगा, गरल विषधर सा तुझे भी धरना होगा, धीर हिमालय सा धर, अब तो अड़ना होगा, नहीं है अबला ग़र ,मौन तू; यह समझाना होगा, शक्ति स्वरूपा चंडी और काली का रुप धर तू , दुर्गा बन अब तो असुरों का मर्दन करना होगा, सबला बन तू , इतिहास अब तो तुझे हीं बदलना होगा, शक्ति रुप महाकाली का धर, तूझे तांडव करना होगा, फिर तांडव करना होगा, फिर तांडव करना होगा | लेखक - मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव पता- निकट शीतला माता मंदिर , शितला नगर ,  ग्राम तथा पोस्ट - बिजनौर , जिला - लखनऊ ,  उत्तर प्रदेश , भारत , पिन - 226002 सम्पर्क - 8787233718  E-mail - manoranjan1889@gmail.com

"शायद वही है प्यार"

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  "शायद वही है प्यार" रातों को जब नींद ना आये, दिल का चैन भी कहीं खो जाये, याद आये कोई जो बारम्बार, शायद वही है प्यार |                 आँखों में खुमारी सी छा जाये,                 सपनों में केवल वो ही वो आये,                 हर पल रहे जिसका इंतज़ार,                 शायद वही है प्यार |    जो जान से भी अजीज़ हो जाये, दिल को उनके बिना कुछ भी न भाये, पाने को जिसे दिल हो बेकरार, शायद वही है प्यार |                 आँखों से दूर होने पर जिनके अश्रु छलक जाये,                 दूर जाते हुए भी जो नयनो...

क्यों ...मेरा मन

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क्यों ... मेरा मन, भटकता रहता है ? सूनसान गलियों में, तो कभी तंहाईयों में, जाने किसे ढूंढता है? मेरा मन | शहरों व कस्बों में, गांव नगर में, जन निर्जन में, पहाड़, जंगल और बीहड़ में, आखिर किसे खोजता है ? मेरा मन | कौन है जो, मेरे अंतर्मन को इतनी गहराइयों तक छू गया? मन को मेरे चितवन से चुरा ले गया | कौन है वो, जिसने मेरे हृदय के  सुनेपन में संगीत बिखेर दिये? दिल के हर तार को, कैसे उसने, झंकृत कर दिये ? आखिर, कौन है वो? जिसके लिए, मेरा मन, व्याकुल सा है | इस संसार से, विरक्त रहकर भी, किसके लिए, मेरा मन, इतना आसक्त है | किसकी, मेरे जीवन में तलाश है? कौन है वो, आखिर, कौन है वो, जिसके लिए, मेरा मन व्याकुल सा है ? https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=155086366232392&id=105834191157610 लेखक - मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव पता- निकट शीतला माता मंदिर , शितला नगर , ग्राम तथा पोस्ट - बिजनौर , जिला - लखनऊ , उत्तर प्रदेश , भारत , पिन - 226002 सम्पर्क - 8787233718  E-mail - manoranjan1889@gmail.com