उनके लिए मेरा मन क्यों उदास है ?

रौनक भरी उनकी इस महफ़िल में,

उनके लिए मेरा मन क्यों उदास है ?

खड़ें हैं सामने उनके सभी भीड़ में,

नहीं वो क्यों मेरे पास हैं ?

चारों ओर शोर ठहाका नजारों में,

पर होंठ क्यों मेरे चुपचाप हैं ?

सभी व्यस्त इधर उधर की बातों में,

हम बतियाते क्यों अपने आप हैं ?

मुंह फेर कोई बात ना करे हमसे,

हमें फिर क्यों उनका इंतजार है ?

हर कोई दोस्तों से घिरा, मगर

अकलेपन में हमें क्यों उनकी तलाश है ?

न बात करते हों मुझसे वो अब,

फिर मुझे क्यों उनसे ये आस है ?

उनके बेरुखे व्यवहार में किस्सा कोई जरूर है,

मगर कसूर क्या मेरा, मसरूफियत क्यों मुझसे है ?

बेशक रूठकर मुझसे दूर वो चलें जायें,

दूर होकर भी मुझे क्यों उनसे हीं फरियाद है ?

उनके लिए मेरा मन क्यों उदास है ?


लेखक - मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव

पता- निकट शीतला माता मंदिर , शितला नगर , ग्राम तथा पोस्ट - बिजनौर , जिला - लखनऊ , उत्तर प्रदेश , भारत , पिन - 226002

सम्पर्क - 8787233718 

E-mail - manoranjan1889@gmail.com

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